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हैरान प्यार

Dazed Love

हैरान प्यार

Nuria García Arteaga

Published by Nuria García Arteaga at Shakespir

Copyright © 2014 Nuria Jiménez Ramírez

Author: Nuria García Arteaga
Editor: Gladys Nuria Jiménez Ramírez
http://www.nuriagarciaarteaga.com

Cover design: Chris Van Velsen ([email protected])
http://www.velsingdesigns.deviantart.com
Author music prologue & epilogue: ‘A quien ire’, Luis Enrique Espinoza
Featuring: Juan Carlos Chavez Contreras
https://www.facebook.com/juancarlos.chavezcontreras.71?fref=ts
Audio Prologue y Epilogue: Nuria Jimenez Ramirez
Mix & mastering: Gustavo Gustavo Adolfo Chavez Reyes www.criterioestudios.com
Fotografía: Nuria Jimenez Ramirez,

Dazed Love is a translation of ‘Novedades Literarias’ that received the “Gabriela Mistral” award at Santiago, Chile in 1982

Calle Las Violetas 156 Urbanización Virú,
Bellavista Callao –Perú

Hecho el Depósito Legal en la Biblioteca Nacional del Perú No: ISBN: 9781311203724

[Shakespir Edition, License Notes
__]This ebook is licensed for your personal enjoyment only. This ebook may not be re-sold or given away to other people. If you would like to share this book with another person, please purchase an additional copy for each recipient. If you’re reading this book and did not purchase it, or it was not purchased for your use only, then please return to Shakespir.com and purchase your own copy. Thank you for respecting the hard work of the author.

हैरान प्यार

लेकिन मेरे शांत प्रेमी तुम आते हो,

उपेक्षा की मदहोश आवाज़ के साथ,

लेकिन तुम आते हो…और मेरी आवाज़

हर कोने में छिप जाती है,

तुम्हारे बदन को साये से ढंकने के लिए।

“Verbo de la tierra” (“धरती की बात”) – राउल मेलेडो कास्त्रो

संगीत पृष्ठभूमि सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें

[+ https://soundcloud.com/gladys-nuria-jimenez-ramirez/prologo-nov-lit-hindi-mixed+]

मैं तुमसे जुलाई में मिली थी। एक अजीब सी उदासी और तेज ठंड थी जो हर एक चीज को उदास बना रही थी।

यह ना तो कठोर था और ना ही खुशनुमा। मेरे दिन अंधेरों से भरे हुए, सुस्त और नीरस थे। सुबह के समय, अपने अस्त-व्यस्त और अकेलेपन से भरे हुए जीवन को हज़ारवीं बार कोसते हुए, मैं आने वाले लोगों का मुस्कुराते हुए अभिवादन करने के लिए अपनी मेज पर बैठ गयी, मेरी मुस्कान मेरी आत्मा को छलनी कर रही थी क्योंकि मैं बस कहीं छिपकर रोना चाहती थी।

जब तुम अंदर आये तो नयी आयी हुई किताबें बिल्कुल व्यवस्थित तरीके से अलमारियों पर रखी हुई थीं। मैंने तुम्हारी छाया की एक झलक देखी और अचानक मेरे तन-बदन में एक कंपकंपी सी उठ गयी।

तुमने एक आकर्षक मुस्कान के साथ पूछा कि क्या तुम कुछ किताबें खरीद सकते हो। और जब मैंने तुमसे कहा कि आपकी खोज को आसान बनाने के लिए किताब की अलमारियों पर निशान लगाया गया है तो मेरे चेहरे की बेवकूफी और मेरी लड़खड़ाती हुई आवाज़ ने मुझे धोखा दे दिया।

तुमने अपने चौड़े कंधे और सुगठित शरीर को घुमाकर मुड़ गए और मैंने देखा कि तुम्हारे बाल तुम्हारी मजबूत गर्दन तक लटके हुए थे। तुम्हारी मर्दानी खुश्बू मेरी साँसों में समा गयी। तुम्हारे पैरों को तेजी से चलते हुए देखते समय और जब तुमने एक नयी किताब तो अपने हाथों में जोर से पकड़ा था तब मैंने उम्मीद की किरण देखीं। मेरा शरीर मचल उठा और मैंने सोचा कि काश तुम मुझे भी ऐसे ही पकड़ते।

अनगिनत महीनों तक मैं बेचैनी से तुम्हारा इंतज़ार करती रही और तुम कभी-कभी अचानक किसी नयी किताब के बारे में पूछने चले आते थे। जनवरी के अंत में तुमने सिल्विना बुलरीच की नयी किताब के बारे में मुझसे पूछा। मैंने तुम्हारे लिए इसे पंद्रह दिन में लाने का वादा किया।

“…‘ये उत्तेजना से भरी हुई, अजीब पंक्तियां तुम्हें केवल यह बताने के लिए है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ। तुमसे यह दूरी मुझे पागल बना रही है, मैं तुमसे कुछ नहीं चाहती हूँ और अपना सब कुछ कुर्बान करना चाहती हूँ। मेरे इस उतावलेपन के लिए मुझे माफ़ कर दो, मैं तुम्हारे लिए जो महसूस करती हूँ उससे मैं बिखर रही हूँ। मैं इस बेचैनी के साथ नहीं जी सकती हूँ। मुझे कॉल करो। – सबरीना’ फर्नान्डो मुस्कुराया और तिरस्कार के साथ उसने कागज़ के टुकड़े को हाथों से मरोड़कर कचरे में फेंक दिया…”

मैंने किताब बंद कर दी। यह कहानी क्रूर, निर्दयी थी लेकिन वास्तिकता इससे भी ज्यादा बुरी थी। हम जितना ज्यादा प्यार देते हैं, बदले में हमें उतना ही कम प्यार मिलता है। काश कि कभी इससे अलग हालात हो पाते। लाइब्रेरी बंद करने में बस केवल पांच मिनट का समय बाकी था। मेरी किस्मत से आज मुझे लार्को एवेन्यू और बाँध के किनारे स्थित “येलो पब” में जगह मिलने वाली थी। अपने ड्रिंक का आनंद उठाते हुए सागर की लहरों को देखना मेरी छोटी-छोटी साप्ताहिक खुशियों में से एक था।

मैंने अपना ब्लाउज उतार दिया और अपने कंधों को खोल दिया। बाहर कोई एयर कंडीशनिंग नहीं थी और मैं अपने शरीर पर उनतीस डिग्री की गर्मी महसूस कर पा रही थी। अपने बाल संवारने के बाद, मैंने खिड़की की ओर देखा और उसमें मुझे अपनी धूप से जली हुई गर्दन और पीठ की परछाई दिखाई पड़ी।

जब तुमने दरवाज़ा खोला तब मैं गर्दन पर “शालीमार” की बूंदे छिड़क रही थी। मैंने अपने शरीर को ढंकने की कोशिश नहीं की और ना ही मैं ऐसा करना चाहती थी। नयी किताबों के तख्ते की तरफ जाते हुए, तुम्हारे शरीर से मेरा शरीर लड़ गया क्योंकि मैं जानती थी कि तुम्हारी नज़र मेरी पीठ और इसके ठीक बीच में मौजूद तिल पर थी। जब मैंने वो किताब पकड़ी जो तुम्हें चाहिए थी तो तुम्हारी तेज साँसों ने मुझे फर्नान्डो की निर्दयी मुस्कान की याद दिला दी जब उसने सबरीना की चिट्ठी कचरे के डब्बे में फेंकी थी। कुछ ही पलों में, मैं जान गयी कि हम बहुत करीब आ गए हैं, अचानक मुड़ने पर, तुम्हारा शरीर मुझसे स्पर्श हो गया और मुझे इसकी कोई परवाह नहीं थी। मैंने तुम्हारी आँखों में एक चमक देखी, और तुम्हारी लंबी पलकों ने तुम्हारी नज़रों को रोक रखा था। जिन हाथों से तुम किताबें पकड़ते थे उन्हीं हाथों से तुमने मेरी कमर को प्यार से पकड़ा। मेरी पीठ, मेरे बालों को सहलाया, और उस समय मुझे अपने पागलपन और अपने ऊपर से काबू खोने का कोई पछतावा नहीं है।

तुम्हारी लाल फ़िएट, पर्शियन कालीन, नेपाल के कढ़ाई किये गए तकियों और उन्मुक्त कलाकृतियों की धुंधली छवियां आज भी मेरे मन में बसी हुई हैं और डिओन वॉरविक की आवाज़ अभी भी मेरे कानों में गूंज रही है: “मुझे पता है मैं ऐसे दोबारा कभी प्यार नहीं करुँगी, इसलिए ये अच्छा वक्त जाने से पहले मैं बस इसमें समा जाना चाहती हूँ।”

एक शब्द भी बोले बिना तुमने मेरे सामने ड्रिंक का प्रस्ताव रखा, मुझे इसे एक ही बार में पीते हुए देखकर, तुमने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और कई घंटों तक मैं तुम्हारी बांहों में धीरे-धीरे पिघलती रही। वो लंबी और उमंगों से भरी हुई फरवरी की रात अभी भी मेरे दिल और दिमाग पर छाई हुई है और मेरे पास बस तुम्हारी यही चीज है।

नए साहित्यिक उपन्यास लगातार आते रहते हैं लेकिन तुम कभी उनकी तलाश में नहीं आये। मुझे लगता है कि फर्नान्डो जरूर तुम्हारे जैसा होगा और जिस तरह से उसने सबरीना की भावनाओं को नकार दिया था और उसे छोड़ दिया था, यह सोचते हुए मेरे शरीर में एक अजीब सनसनी फैल जाती है। तुमने मेरा शरीर पढ़ा और उसे अलमारियों के बीच एक कभी ना खत्म होने वाली नीरसता के साथ बांधकर रख दिया।

[+ https://soundcloud.com/gladys-nuria-jimenez-ramirez/epilogue-dazed-love+]

[email protected]

http://www.nuriawriter.nl/

https://www.facebook.com/Nuria.writer/

About the Author

Nuria was born in Lima, Peru, her mother was Peruvian, her step-father an African American who introduced her to books and writing.

At age ten she received an award on a national schools competition of stories based on the Inca culture. She graduated as Psychologist at Universidad Católica and followed MA studies on International politics at Universidad de Chile.

At age thirty three she received two more awards: Fundación Givre at Buenos Aires Argentina for the short story “El hombre del portal” and Gabriela Mistral in Santiago, Chile for a collection of 13 short stories “La Era de Acuario” which included ‘Novedades Literarias’ the original title of ‘Dazed love’. The story was published by magazine Paula, Santiago, Chile.

In 1982 Nuria moved to The Netherlands where she raised her four sons. She followed several post-doc studies and spent three years on a PhD study on Pedagogics at Leiden University. After finishing her career as academic researcher and docent, she is now a full time writer.

Publications:

The first volume ‘Entre Garua y odio’ – Between Drizzle and Hate- of her Trilogy “La Maratón del Amor” – The Love Marathon- was published in December 2013.

The Trilogy is the first part of a Saga that includes three more books focusing on addictions, multinationals and migrants.

Nuria has forty publications in five languages.

Her work as editor includes an Anthology of Latin American writers ‘Eros in America’ and the novel ‘Cuba solo para Turistas’ from J.L. Seco, a Cuban-American writer.

Her pen name is to honor her stepfather and her grandma on mother’s side. She enjoys dialogue with her readers.

http://www.nuriagarciaarteaga.com

@nuriawriter (twitter)


हैरान प्यार

The main character of the story falls in love with her dream man. The location is Lima, Peru. After a night of passion, the dream man disappears. Is love just an illusion? Can an infatuation be confused with love? Is love a way to escape solitude? The reader might find the answers in the story. The prologue and epilogue are poems from famous Indian lady poets presented by the author. The back ground music is a mix of Indian sounds used in trance lounge music.

  • ISBN: 9781370048496
  • Author: Nuria Garcia Arteaga
  • Published: 2017-03-31 22:20:14
  • Words: 1465
हैरान प्यार हैरान प्यार